सूटकेस वाली पूरा स्टेशन लोगों से खचाखच भरा हुआ था हर तरफ भारी भीड़ और धक्का-मुक्की का आलम था ।सभी को अपने अपने गंतव्य तक जाने की जल्दी थी तो इसलिए सभी बड़ी बेसब्री से अपनी अपनी ट्रेनों के आने का इंतजार कर रहे थे राहुल भी किसी तरह धक्के मुक्के खाते प्लेटफॉर्म पर जा पहुंचा पहले तो भीड़ को देख कर मन किया कि वापस हो जाए पर देर हो चुकी थी वापस जाने का कोई साधन नहीं और साथ में इतना सामान बड़ी आफत थी । अभी किसी तरह उसने खुद को अडजस्ट ही किया था कि अचानक उसकी नजर एक गोरी चिट्टी सुंदर सी युवती पर पड़ी जो एक नीले रंग का सूट सलवार पहने हुए खड़ी थी और बड़ी ही व्याकुलता से ट्रेन के आने का इंतजार कर रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे वह घर छोड़ कर आई थी या उसका कोई पीछा कर रहा था क्योंकि रह-रहकर बार-बार, वो लिए हुए अपने सूटकेस को देखती और तो कभी डरी डरी इधर उधर देखती तो कभी कभी बाहर गेट की ओर देखती । कि कहीं कोई आ तो नहीं रहा है जो उसे पकड़ ले जैसे कोई चोर हो या चोरी करके आई हो इस तरह से सहमी सहमी सी थी और प्ल...