व्हाटसप ,फेसबुक पर भारी एक प्रेम पत्र(भाग-1) कितना विचित्र लगता है न, जब हम किसी को इस माडर्न 21वीं सदी में पुराने खयालातो ,विचारों वाला पाते हैं। कुछ ऐसी ही तो कहानी है "मेरा शहर"की। जहाँ एक नायक और एक नायिका इस माडर्न जमाने में व्हाटस अप ,फेसबुक से दूर प्रेम पत्र लिखते हैं एक दूजे को ,और अपनी भावनाओ को व्यक्त करते हैं। नायक: हाय कर्णिका । मै जानता हूँ कि तुम्हें मेरा यूं बुलाना अच्छा नहीं लगता। मेरे द्वारा दिया गया ये नाम तुम्हें "कर्णिका"। पर एक हकीकत ये भी है कि तुम चाहती हो कि तुम्हें कोई उपनाम से बुलाए ,कोई तुम्हें एक नाम दे जो खास हो तुम्हारे लिए। जानते हो ये नाम तुम्हें क्यो दिया है ?क्या सोचकर ये नाम रखा है ? जानते हो क्यो ? तुम्हारा कान की बालियों के प्रति शौक को देखकर, मैने नोटिस किया कि सप्ताह में तुम्हारे कानो की बालियां बदलती रही हैं और जब भी तुम मेरे सामने रही तुम्हारी अंगुलियां कानो की बालियों पर फिरती रहीं। और मुझे ऐसा लगता रहा की तुम मुझे अपनी स्टाइलिश दिखने वाली बालियां दिखाना चाहती हो , और पूछन...