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Showing posts from November, 2017
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व्हाटसप ,फेसबुक पर भारी एक प्रेम पत्र(भाग-1) कितना विचित्र लगता है न, जब हम किसी को इस माडर्न 21वीं सदी में पुराने खयालातो ,विचारों वाला पाते हैं। कुछ ऐसी ही तो कहानी है "मेरा शहर"की। जहाँ एक नायक और एक नायिका इस माडर्न जमाने में व्हाटस अप ,फेसबुक से दूर प्रेम पत्र लिखते हैं एक दूजे को ,और अपनी भावनाओ को व्यक्त करते हैं। नायक: हाय कर्णिका । मै जानता हूँ कि तुम्हें मेरा यूं बुलाना अच्छा नहीं लगता। मेरे द्वारा दिया गया ये नाम तुम्हें "कर्णिका"। पर एक हकीकत ये भी है कि तुम चाहती हो कि तुम्हें कोई उपनाम से बुलाए ,कोई तुम्हें एक नाम दे जो खास हो तुम्हारे लिए। जानते हो ये नाम तुम्हें क्यो दिया है ?क्या सोचकर ये नाम रखा है ? जानते हो क्यो ? तुम्हारा कान की बालियों के प्रति शौक को देखकर, मैने नोटिस किया कि सप्ताह में तुम्हारे कानो की बालियां बदलती रही हैं और जब भी तुम मेरे सामने रही तुम्हारी अंगुलियां कानो की बालियों पर फिरती रहीं। और मुझे ऐसा लगता रहा की तुम मुझे अपनी स्टाइलिश दिखने वाली बालियां दिखाना चाहती हो ,    और पूछन...
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बाराती                                             बाराती इस पर इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि शादी ब्याह का सीजन चल रहा है और एक लेखक हर जगह कुछ नया देखने और लिखने की कोशिश में रहता है ,ठीक उसी प्रकार से जैसे कवि प्रेम श्रंगार , वैज्ञानिक विज्ञान की दृष्टि से, चोर अपने मतलब की वस्तुओं को देखता है। कविवर बिहारी के शब्दों में। " शौके दीदार है तो नजरिया पैदा कर " तो इससे अछूता मैं कैसा रह सकता हूँ एक लेखक होने के नाते। मै एक शादी समारोह में था तो वहाँ जो घरातियों और बरातियों के बीच हुआ तो खुद को लिखने से रोक नहीं पाया। और वैसे भी किसी की शादी में बाराती और बारात  कितना महत्वपूर्ण होते हैं दोनों पक्षों के लिए ये जग जाहिर है ,कि कितने आदरणीय और सम्मानीय होते हैं। ये बाराती ही होते हैं जो लडका पक्ष और लडकी पक्ष की बुराईयांं या तारीफे करता है, यही वो कारक हैं जो इज्जत बनाते या बिगाडते हैं। और अगर ये कहा जाए की बाराती ही किसी शादी की शान होते हैं तो अतिश्...
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                                  एक अहसास जानते हो। मैं तुम्हें कुछ बताना चाहता हूँ कुछ कहना चाहता हूँ। मैने कई बार सोचा महसूस किया बताना चाहा ,पर बताया नहीं। वैसे इसलिए भी नहीं बताया क्योकि मै जानता हूँ कि तुम्हारे हृदय में मै नहीं बसता ,मै नहीं रहता , कोई और है जो तुम्हारे खूबसूरत हृदय में रहता है मै नहीं। ऐसे में किस अधिकार से बताता तुम्हे । मेरा कोई अधिकार नहीं है तुम पर और कैसा किस प्रकार का अधिकार । मै जबरदस्ती क्यू जताऊ अधिकार किसी पर। अधिकार तो वहाँ होता है जहाँ प्रेम होता है ,जहाँ विश्वास होता है जहाँ व्यक्ति एक दूसरे को समझता है जहाँ एक दूसरे का अहसास होता है। मै नहीं जानता तुम्हें है या नहीं। पर मुझे है तुम्हारा अहसास , क्यू है शायद सही तरह से मुझे भी नहीं पता और शायद तुम्हें भी ,पर हम इसी अहसास को प्रेम मोहब्बत इश्क प्यार न जाने क्या क्या नाम देते हैं । मै इस अहसास को क्या नाम दूं समझ में ही नहीं आता , जब भी तुम मेरे आस पास होते हो या मेरे करीब से गुजरते हो , ...