डायरी महात्मा गांधी को पढ रहा था और पढते हुए ऐसा लगा कि मुझे भी अपनी आटो बायोग्राफी लिखनी चाहिए पर खयाल आया कि लिखुंगा क्या ? ऐसा तो कुछ है नहीं, हुआ ही नहीं कुछ जीवन मे, जिसे लिखा जाए, फिर लिखूं क्या ? ये एक बडा प्रश्न उठ खडा हुआ मेरे सामने, लिखने के विषय में। और अचानक से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की बात याद आई। उन्होंने कहा था कि हमें प्रतिदिन डायरी लिखनी चाहिए । कुछ न हो लिखने के लिए तो अपने प्रतिदिन के कार्यों को ही लिखें पर लिखें जरूर। मुझे भी लगा कि सही तो है लिखने मे बुराई क्या है ? यदि मैं किसी क्षेत्र में प्रसिद्ध नहीं । क्या एक आम आदमी को हक नहीं अपने जीवन के विषय में लिखने का। वह आम आदमी ही तो होता है जो एक विशेष आदमी बनता है और क्या पता समय कब करवट ले बैठे। "समय की ही तो बात होती है कि अमीर घर का चोर लडका इमानदार तो वहीं गरीब घर का इमानदार लडका भी चोर नजर आता है।" गांवों मे एक उक...