बाराती

      
                                    

बाराती इस पर इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि शादी ब्याह का सीजन चल रहा है और एक लेखक हर जगह कुछ नया देखने और लिखने की कोशिश में रहता है ,ठीक उसी प्रकार से जैसे कवि प्रेम श्रंगार , वैज्ञानिक विज्ञान की दृष्टि से, चोर अपने मतलब की वस्तुओं को देखता है।
कविवर बिहारी के शब्दों में।
" शौके दीदार है तो नजरिया पैदा कर "
तो इससे अछूता मैं कैसा रह सकता हूँ एक लेखक होने के नाते।
मै एक शादी समारोह में था तो वहाँ जो घरातियों और बरातियों के बीच हुआ तो खुद को लिखने से रोक नहीं पाया।
और वैसे भी किसी की शादी में बाराती और बारात  कितना महत्वपूर्ण होते हैं दोनों पक्षों के लिए ये जग जाहिर है ,कि कितने आदरणीय और सम्मानीय होते हैं।
ये बाराती ही होते हैं जो लडका पक्ष और लडकी पक्ष की बुराईयांं या तारीफे करता है, यही वो कारक हैं जो इज्जत बनाते या बिगाडते हैं।
और अगर ये कहा जाए की बाराती ही किसी शादी की शान होते हैं तो अतिश्योक्ती न होगी।
मैं पहुंचा ही था देखा कि मण्डप और जयमाल पडने का स्टेज लगभग सज चुका था ।थोड़ी बहुत जो कसर बाकी थी वह माली पूरा कर रहा था।
तो वही दूसरी ओर भोजन का पण्डाल लगा हुआ था ,तमाम तरह की भोजन (खाद्य) सामग्री आइसक्रीम,चौमीन ,डोसा ,बर्गर,बतासे,चांट ,चुरमुरा( भेलपुरी ) सकौडा ,मिठाईयां,तरह की सब्जी,पूरी पुलाव आदि व्यंजनों सै स्टाल सजा हुआ था।
अतिथियों की भारी भीड़,पूरा मेला लगा हुआ था।
थोड़ी देर में बाराती आने वाले थे ।
घराती होने के कारण मुझे भी काम पर लगा दिया गया कि खाने पीने की पूरी व्यवस्था देखने के लिए कि कहीं कोई कमी न रह जाए।
तो मैं भी रौब के साथ एक अधिकारी की भांति निरीक्षण करने लगा और स्टाल पर लगे लोगों से पूरी व्यवस्था दुरुस्त करने को कह दिया और जब पाया की सब कुछ व्यवस्थित हो गया है तो सोचा चलो बारात की तरफ भी नजर घुमा आये।
बारात भी अपने पूरे लाव लश्कर के साथ पूरे रौब में चलने को तैयार थी।
तभी आवाज आई"दूल्हे के मित्रगण कहाँ गए,डांस भांगडा कौन करेगा?"
इतने में किसी ने कहा,"भैया,वो लोग तो पैग लगाने गये है।"
अजीब सा फैशन बन गया है।
मैने मन में कहा '"हाँ! सही है । जबतक ये पैग न लगायेंगे तबतक इनका महान कलाकार डांसर कहाँ जागने वाला है ? जब दारु अंदर जायेगी तभी डांसर बाहर आयेगा ।"
दूल्हे के मित्रगण आ गये और डीजे भी अपनी दमदार आवाज में बज रहा था।
एक दो ने नाचना शुरू किया और बाकी जैसे किसी के इंतज़ार में थे, तभी मैंने देखा की ये महान डांसर ,दूल्हे के मित्रगणो की नजर सडक किनारे बने मकानों की छत पर है।
तब मांजरा समझ आया की अभी दर्शक नहीं आये हैं।जैसे ही बारात आगे बढी तो कुछ छतों पर दर्शकों की उपस्थिति दर्ज हुई थी की फिर क्या सारे डांसर शुरू हो गये। नाच धरती पर रहे थे और नजरें ऊपर छतों पर और यदि किसी बारात में'काला कौआ काट खायेगा सच बोल, नागिन और कुछ भोजपुरी आदि गानो के बिना तो बारात जैसे अधूरी ही रहती है और यदि किसी बारात में नागिन डांस न हो तो समझो कुछ हुआ ही नहीं।
जैसे जैसे बारात आगे बढ रही थी वैसे वैसे छतों पर  दर्शिकाओं की उपस्थिति भी ज्यादा दर्ज होती जा रही थी।और वैसे वैसे बारातियों में नाचने वालों की गति भी बढ रही थी और एक होड सी लग गई सबसे अच्छा नाचने की।
अपनी अपनी फरमाइश के डीजे वाले से गाने बजवाते हैं और डांस के साथ पूरा फोकस रहता है कि छतों पर दर्शक हैं कि नहीं। और जब इस बीच कुछ घराती डांसर भी आ जाते हैं ये दिखाने की हम भी किसी से कम नहीं,तो ऐसे में कभी बराती और घराती में धक्का मुक्की और गहमा गहमी हो जाती है और हो भी गई पर मामला शांत हो गया।
बारात पहुचने को ही थी कि मुझे याद आया ,मूझे तो व्यवस्था देखनी है सो मैं भोजन की व्यवस्था देखने वापस आ गया।
सब कुछ अच्छा चल रहा था कहीं कोई अव्यवस्था नहीं। पर पता नहीं कहाँ से एक बाराती जोकि नशे में धुत कहने लगा,"ये कोई व्यवस्था है ये कोई खाना है ,ये नहीं वो नहीं है आदि ।तो ऐसे में हमारे एक घराती भाई साहब को बुरा लगा और फिर बात बढ गई।किसी तरह से दोनों को समझाया गया।
"भई ! अपनी इज्जत अपने हांथ ।
इन बारातियों को क्या पडी है किसी की इज्जत की ,खुद नशे में टुन्न हैं इन्हें तो न अपनी इज्जत की परवाह और न अपने मित्र की जिसकी बारात मे आए हैं। ये शायद इसलिए आते ही हैं कुछ ऐसा हो जाए की जीवन पर्यन्त कहने को मौका मिले की" फला की शादी में गये थे और वहाँ ये हुआ था मजाक बनाये।
आज कल तो ये एक फैशन सा हो गया है शराब पीना,लडाई झगड़ा,गोली चलना चलाना।
इन सबके बिना तो शादी समारोह जैसे फीका सा लगने लगा।
पर मैं ऐसे लोगों( बारातियों) को कहना चाहुंगा की जैसी हमारी इज्जत उसी प्रकार दूसरे की इज्जत।
यदि हम आज किसी की शादी में विघ्न डालते हैं तो कल हमारी शादी में भी कोई विघ्न डालेगा और हमें शर्मिंदा होना पडेगा।क्योंकि ये दुनिया प्रकृति का दस्तूर भी है की " कर्म का फल मिलेगा,
आज नहीं तो कल मिलेगा।
पर मिलेगा जरूर।"

अमित साहू

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