व्हाटसप ,फेसबुक पर भारी एक प्रेम पत्र(भाग-1)
कितना विचित्र लगता है न, जब हम किसी को इस माडर्न 21वीं सदी में पुराने खयालातो ,विचारों वाला पाते हैं।
कुछ ऐसी ही तो कहानी है "मेरा शहर"की।
जहाँ एक नायक और एक नायिका इस माडर्न जमाने में व्हाटस अप ,फेसबुक से दूर प्रेम पत्र लिखते हैं एक दूजे को ,और अपनी भावनाओ को व्यक्त करते हैं।
नायक: हाय कर्णिका ।
मै जानता हूँ कि तुम्हें मेरा यूं बुलाना अच्छा नहीं लगता।
मेरे द्वारा दिया गया ये नाम तुम्हें "कर्णिका"।
पर एक हकीकत ये भी है कि तुम चाहती हो कि तुम्हें कोई उपनाम से बुलाए ,कोई तुम्हें एक नाम दे जो खास हो तुम्हारे लिए।
जानते हो ये नाम तुम्हें क्यो दिया है ?क्या सोचकर ये नाम रखा है ? जानते हो क्यो ?
तुम्हारा कान की बालियों के प्रति शौक को देखकर,
मैने नोटिस किया कि सप्ताह में तुम्हारे कानो की बालियां बदलती रही हैं और जब भी तुम मेरे सामने रही तुम्हारी अंगुलियां कानो की बालियों पर फिरती रहीं।
और मुझे ऐसा लगता रहा की तुम मुझे अपनी स्टाइलिश दिखने वाली बालियां दिखाना चाहती हो , और पूछना चाहती हो जैसे कि बताओ कैसी लग रही हैं बालियां मेरी।
इसलिए मैने तुम्हारा नाम कर्णिका रखा,वैसे एक बात है तुम्हारी पसंद कमाल की है ,मानना पडेगा क्या पसंद है।
कर्णिका मै नहीं जानता कि तुम्हारे हृदय में मेरी क्या जगह है,क्या इम्पार्टेंस है मेरी? पर मेरे लिए तुम बहुत मायने रखते हो।
कर्णिका मै चाहता तो तुम्हें फोन या व्हाटसप कर सकता था ,पर ऐसा नहीं किया ।
जानते हो क्यो?
क्योकि मै उस अहसास को जीना चाहता हूँ जो इस व्हाटसप, फेसबुक से नहीं मिल सकता।
तुम्हें पता है ।
जब मै तुम्हे सिर्फ पत्र लिखने की सोच ही रहा था तब,लिखने से पहले हजार बार सोचा हूंगा लिखू की न लिखू और लिखू भी तो क्या?
जब हाथ में पेपर और पेन पकडा लिखने के लिए , तब उस वक्त धडकने रेस में जीतने वाले घोडे के समान तीव्र गति से कडबक कडबक किये जा रहा था
और डर तो ऐसे लग रहा था जैसे मैने किसी का मर्डर कर दिया हो और अब मुझे फांसी पर लटकाया जा रहा है , यमराज के दूत आकर कह रहे हो "चल सिध्दू तेरा वक्त पूरा हो गया चल "।
सच मानो शरीर के रोम रोम में कम्पन और रोएं खडे हुए जा रहे थे भय से ।
और भय हो भी क्यूं न ,
पहली बार जो किसी को पत्र लिख रहा था और वो भी प्रेम पत्र,हां इसे प्रेम पत्र ही तो कहेंगे।
मुझे याद है की पत्र इसके पहले स्कूल,कालेज के टाइम लिखा था और वो भी परीक्षा में पूछे गये प्रश्न के जवाब में।
पर हकीकत में पहली बार ।
मैने कभी सोचा भी नहीं था की किसी को कभी यूं पत्र भी लिखूंगा ।पर मैं आज लिख रहा हूँ क्योकि मै प्रेम के उस अहसास को जीना चाहता हूँ जिस पवित्र प्रेम की कहानियाँ सुनी हैं ,जिसे महसूसकर रहा हूँ कुछ समय से । पर इसमें प्रगाढता तभी संभव है जब तुम्हारा साथ होगा।
ये पत्र पढते वक्त तुम्हारे मन में कई प्रश्न जरूर उठ रहे होंगे जहाँ एक ओर मन में खुशी भी हो रही होगी कि मुझे भी कोई चाहने वाला है तो वही ये प्रश्न भी होगा कि आखिर मै ही क्यूं ? मुझमे ऐसी कौन सी बात है ? मुझसे भी सुन्दर सुंदर लडकियां है जैसे तमाम इस तरह के प्रश्न।
और हां सही भी है इस तरह के प्रश्नों का उठना।
तो मै तुम्हारे इन प्रश्नों का पहले ही जवाब दे देता हूँ क्योकि पता नहीं ,तुम्हारा जवाब क्या होगा , हां या न । जवाब आयेगा भी या नहीं । मै फिर पत्र लिखने की हिम्मत कर पाउंगा भी या नहीं ,
पता नहीं।
कर्णिका अगर तुम्हारा प्रश्न होगा " सिध्दू मुझसे भी सुंदर लडकियां हैं और मुझसे भी सुंदर लडकी तुम्हें मिल जायेगी ।"
तो कर्णिका मेरा जवाब होगा कि हाँ , तुमसे भी सुंदर लडकियां हैं , होंगी । मुझे मिल भी जायेंगी।
पर मेरे लिए तुमसे ज्यादा खूबसूरत कोई नहीं, तुम चाहे कैसी भी हो ।
ठीक वैसे ही जैसे एक अंधे को रात क्या और दिन क्या , कुछ ऐसा ही हाल मेरा है ।
तुम तन से जितनी खूबसूरत हो उससे कहीं ज्यादा मन से,दिल से हो ,मै तुम्हारे लम्बे बालो या बडी बडी काली आंखों, और उन आंखों पर लगे काजल या तुम्हारी मुस्कुराहट, तुम्हारे बोलने बात करने का अंदाज ,तुम्हारी मीठी आवाज,कैसी भी परिस्थिति में ढल जाने का हुनर मै तुम्हारे किन किन गुणो को बताऊं कर्णिका कि तुममे क्या क्या खूबियां है?जो मुझे तुम्हारा दिवाना बनाता है ,तुम्हारे मेरे साथ न होते हुए भी, मेरे पास होने का अहसास कराता है ।जानते हो तुम याद आते ही मेरे अराध्य याद आ जाते हैं और जब अराध्य को याद करता हूँ तो तुम भी याद आ जाते हो ।
ऐसा तो पहले नहीं था पर इन कुछ वर्षों में न जाने तुमसे कितना लगाव हो गया? तुम मेरे पास न होकर भी हर वक्त मेरे पास रहते हो ,तुम्हें थोडी खरोंच भी आ जाती है तो मुझे फील हो जाता है कि तुम्हारे साथ कुछ हुआ है , तुम खुश हो या दुखी हो मुझे तुम्हारे हरपल का अहसास हो जाता है ,
और रही नाम की बात तो कर्णिका तुम मेरे लिए कर्णिका ही रहोगी , मै तुम्हें कर्णिका ही कहुंगा तुम्हारा जवाब कुछ भी हो क्योकि मै तुम्हें आज के इन बनावटी नामों जैसे बेबो ,बेब्स ,बाबू और न जाने क्या क्या कहते हैं ।मै तुम्हें ये नाम नही देना चाहता जिनका कुछ अस्तित्व ही न हो,जो चार दिन तो अच्छे लगेंगे पर इसके बाद क्या?जो शायद बदलते वक्त के साथ धूमिल हो जायेंगे कहीं खो जायेंगे।
कर्णिका जो भी बाते कहना चाहता था लगभग पूरी हो गई,बस डर इस बात का है कि क्या ये पत्र तुम्हें ही मिलेगा या पहली दफा ही मेरा पत्र पकडा जायेगा ।
खैर कुछ भी हो ,मै प्रेम में जिस को को जीना चाहता हूँ जिसमे पकडे जाने का डर भी हो , प्रेम भी हो,प्रेम का अहसास भी ,मिलने की तडप ,कुछ कर गुजरने की चाहत हो , पत्र को छुपा कर रखना और कभी कभी उस पत्र को निकाल कर फिर पढना ।
ये सब व्हाटसप फेसबुक से कहाँ मिलता ।
इसलिए पत्र लिख रहा हूँ और तुम्हें इस आशा में भेज रहा हूँ कि तुम्हारा जवाब आयेगा।
जवाब कुछ भी हो कर्णिका पर तुम्हारे जवाब का इंतजार रहेगा ।
तुम्हारा सिध्दू।
नहीं नहीं तुम्हारा सिध्दू नहीं अभी तो मेरा तुमपर कोई अधिकार भी नही।
इसलिए सिर्फ' सिध्दू'.......!
To be continue....
By Amit Sahu......✍

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