व्हाटसप,फेसबुक पर भारी एक प्रेम पत्र (भाग-2

व्हाटसप फेसबुक पर भारी एक प्रेम पत्र के पहले भाग में आपने पढा कि सिध्दू ने अपने प्रेम को अपना बनाने के लिए आधुनिक तरीकों से दूर प्रेम पत्र लिखता है और उसे जिस नाम वह बुलाता है उसका भी कारण बताता है और आशा करता है कि कर्णिका जिसे वह अपनी गर्लफ्रेंड बनाना चाहता है,वह उसे भी पत्र लिखेगी और जब वह पत्र नहीं लिखती कोई जवाब नहीं आता तब वह दूसरा खत लिखता है ।
पढे आगे कि कहानी भाग- 2 में,

सिध्दू:  हाय कर्णिका।
         आशा करता हूँ ,तुम अच्छी होगी,
खुश होगी..... मेरे बगैर।
कोई बात नहीं कर्णिका जो तुमने मेरे पत्र का कोई जवाब नहीं दिया।
पर एक प्रश्न उठ रहा है मन में कि तुमने आखिर कोई जवाब क्यों नही दिया?ु क्या वजह हुई?
और एक मै ठहरा, जो पगलो की तरह या यूं कहूँ "करण अर्जुन" फिल्म में जिस तरह करण अर्जुन की माँ इंतज़ार करती है करण अर्जुन के आने का, कुछ उसी तरह मै इंतजार करता रहा तुम्हारे जवाब का ।
कि तुम्हारा पत्र आयेगा आयेगा पर नहीं आया।
पर तुम क्या जानो कि कितनी हिम्मत जुटा पाने के बाद आज पुनः तुम्हें पत्र लिख पा रहा हूँ।मजाक नहीं कर्णिका ,
शायद इतनी हिम्मत हिमालय पर्वत को उठाने में करता तो उसे भी उठा लेता और हिमालय को उठाकर पाकिस्तान के ऊपर रख देता जो भारत के लिए नासूर बना पडा है इस तरह उसका अंत हो जाता और मै सिध्दू से हनुमान बन जाता। पर मै तुम्हारी मोहब्बत में पागल  हुआ जा रहा हूँ और तुम हो कि न जाने कहाँ मशगूल रहते हो।
कवि अमित ने एक बहुत ही अच्छी पंक्ति लिखी है।
कुछ इस तरह है जो " न सितम ढाओ यूं ,किसी मजलूम पर,कभी उसकी भी तकदीर बोल उठेगी। जबतक अहसास होगा कुछ तुम्हें,फिर ऐसा न हो कहीं ,की बहुत देर हो चुकी होगी।"
 जानती हो कर्णिका ।
जब आज तुम्हें पुन: पत्र लिखने बैठा तो धडकने इतनी तेज तो न थी जितनी पहली बार थी पर डर जरूर लग रहा था कि कहीं कोई देख न ले ,कहीं पकडा न जाऊं। मेरी हालत बिल्कुल एक चोर की तरह हो गई थी पर इस तरह भी एक आनन्द प्राप्त हो रहा था ।
पत्र लिखते हुए बीच बीच ऐसा भी लग रहा था जैसे मै " सिर्फ तुम" फिल्म का मै हीरो 'दीपक' हूँ और तुम उस फिल्म की हिरोइन ' आरती ।'
बस फर्क है तो सिर्फ इतना कि मै तुम्हें पत्र लिखता हूँ पर तुम नहीं ।
जानती हो कर्णिका 
जब पत्र लिख रहा था तो सिर्फ तुम फिल्म का ये गाना याद आ रहा था ।
" पहली पहली बार मोहब्बत की है , कुछ न समझ में आये ,मै क्या करूं।
इश्क ने मेरी ऐसी हालत की है कुछ न समझ में आये मै क्या करूं?"
है न दिल छू लेने वाला गीत ।
और सच में कुछ इस गाने की तरह ही तो है मेरा हाल जो तुम्हारे पत्र के आने का इंतज़ार में भी एक सुखद अनुभूति अनुभव कर रहा है ।
और कहते है न 'सब्र का फल मीठा होता है ' बस इसी आश में की शायद....
कल मैं बाजार गया हुआ था और न चाहते हुए भी मेरे कदम एक चूडी की दुकान पर जाकर ठिठक से गये ।कितनी अच्छी सुंदर लग रही थी कांच की चूडियां मन तो किया ले लूं ,
पर किस अधिकार से लेता और अगर ले भी लेता तो मां या और कोई जब पूछता ,तो क्या जवाब देता?
बस फिर चला आया, कुछ नहीं लिया ।मै किस काम से गया था यह भी भूल गया था।
घर आया और मा ने जब चार बात सुनाई तब याद आया कि मुझे तो भतीजे के लिए बर्थडे गिफ्ट लेना था । और हां नहीं भूला था तो सिर्फ तुम्हें और एक ये गाना जो गुनुगुना रहा था ।
"  मेरे प्यार में तूने क्या किया ?सच सच कहो तुमने क्या किया ?कभी कभी भूला कभी याद किया। कभी कभी भूला कभी याद किया।"
कर्णिका तुम बताओगी कभी मुझे ।
कि मेरा भी अधिकार होगा कुछ तुम पर ,मै पूछ सकूं कैसे हो ?क्या हाल है?
या फिर ये सब मेरा एक ख्वाब एक सपना ही रह जायेगा।
कर्णिका कहीं ऐसा तो नहीं ।
तुम मुझे जानबूझकर कर परेशान कर रही हो ,तंग कर रही हो मुझे और ऐसा करके तुम्हें आनन्द मिल रहा हो या ये लग रहा हो कि मुझसा हैंडसम लडका सिंगल कैसे रह सकता है अबतक , और मैं झूठ बोल रहा रहा हूँ ।
तो कर्णिका ऐसी कोई बात नहीं है सच में मै अकेला हूँ कोई नहीं है मेरे जीवन में और अब किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता।
आशा करता हूँ कर्णिका कि इस बार तुम्हारा जवाब जरुर आयेगा।
सिध्दू
To be continue........
 इस कहानी की अगली कडी और अंतिम भाग शीघ्र ही आपको पढने के लिए लेकर उपस्थित होऊंगा 
धन्यवाद

Author~Amit Sahu

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