गर्लफ्रेंड है या परेशानी

आज कितने दिनो बाद आशीष अपने बहुत ही घनिष्ठ
मित्र से मिला था मेरा शहर के एक गेस्ट हाउस में । कितना खुश हुए थे दोनो मिलकर ,इस बात का अंदाजा उनके चहरे को देखकर बताया जा सकता था।
आशीष के हाल चाल पूछते ही बडी गर्मजोशी के साथ सुधांशू ने कहा बहुत बढिया ,सब अच्छा बीत रहा है तुम सभी दोस्तों की दुआएं हैं ईश्वर की कृपा है।
तभी आशीष ने कहा , "अरे यार रहते कहाँ हो आजकल ,क्या कर रहे हो इस समय । तुम्हारा नम्बर जब भी लगाओ लगता ही नहीं ,नाट रिचबल या फिर स्विच आफ ।
नम्बर बदल दिया है क्या?
कम से कम बता दिया करो नम्बर बदलने से पहले । पुराने सभी मित्र टच में रहते हो तो अच्छा लगता है बात करके।
अभी कल ही अनुराग पूछ रहा था तेरे बारे में , मै क्या बताता उसे?
और तुम हो कि तुम्हारा कुछ अता पता ही नहीं रहता।
सुधांशू ने कहा अरे यार आशीष कोई नम्बर वम्बर बदला  नहीं है  बस बंद कर रखा है ।
इतना सुनते ही आशीष बोल पडा ऐसा क्या हो गया भाई ?
फिर क्या सुधांशू शुरू हो गया विविध भारती की तरह ।
ठीक वैसे ही जब किसी से हालचाल पूछो तो सब बढिया ठीक ठाक कहेंगे और फिर थोडी ही देर में अपना दुखडा रोने लगेंगे वही हाल सुधांशू का रहा ।
वैसे हर कोई अपनी समस्या जैसे काम धंधा नहीं चल रहा या बास का मूड मुझसे उखडा उखडा रहता है  या माली हालात अच्छे नहीं बतायेंगे ,पारिवारिक टेंशन या फिर बीवी से परेशान बताएंगे पर सुधांशू की ऐसी कोई समस्या नहीं थी फिर भी परेशान क्या बहुत परेशान था और परेशानी का कारण और कोई नहीं बल्कि उसकी अपनी गर्लफ्रेंड थी।
आशीष ने कहा क्या बात करता है यार ।मेरी आज तक कोई गर्लफ्रेंड बनने को तैयार नहीं और तेरे पास है तो तू गर्लफ्रेंड से परेशान।
सुनकर आशीष को अपने लिए दुख तो सुधांशू के ऊपर हंसी आ रही थी।
और फिर दोनो दोस्त एक दूसरे को देखकर ठहाके लगाने लगे।
फिर आशीष का मित्र सुधांशू गंभीर होते हुए बोला नहीं आशीष यह सच है ,मै अपनी गर्लफ्रेंड से परेशान हूँ।
आशीष ने कहा कुछ बताएगा भी हुआ क्या?कहीं और शादी वादी हो रही है क्या उसकी या बात नहीं कर रही तुमसे या फिर किसी बात को लेकर झगडा हुआ तुम दोनों के बीच ।अच्छा ये वही है न जिसे तुमने मुझे एक बार मेरा शहर चौराहे के बगल पेट्रोल पम्प पर मिलवाया था या अब कोई और है ।
सुधांशू: नहीं यार वही है ।
आशीष: अच्छा उसका नाम क्या था?मैं भूल सा रहा हूँ। अंजलि नाम है क्या उसका?
सुधांशू :नहीं यार,अंजलि नहीं।काव्या नाम है ।
आशीष: हां हां ठीक ठीक याद आया, वो जो गोरी सी और बडी आंखों वाली थी ।
वैसे क्या हुआ तुम दोनों के बीच ?जब मुझसे मिलवाया था तब तो सब बढिया था तुम दोनों खुश थे तो अब क्या हुआ?
सुधांशू: अब क्या बताऊं यार कि क्या हुआ? वो अब कुछ ज्यादा ही पजेसिव हो गई है और सक्की भी।
मै कहीं भी जाऊ तो बताकर जाऊं या उसे अपने साथ लेकर जाऊं मुझे कहीं किसी काम या मीटिंग में देरहो जाए तो फोन पर फोन , बिल्कुल इकदम छोटी जिद्दी बच्ची सा व्यवहार करती है कभी कभी बिल्कुल समझने कि कोशिश नहीं करती कि कितनी इम्पार्टेंट मीटिंग या काम में व्यस्त हो सकता हूँ?
पर उसे इन सब बातों की कोई परवाह नहीं ।थोडी थोडी बातों पर चिडचिडाना झल्लाना और सबसे बडी बात उसका शक करना कि मेरा किसी और से अफेयर न हो जाए।
मैं जानता हूँ यार आशीष की वह भी मुझे बहुत प्रेम करती है इसलिए उसे मेरी इतनी परवाह रहती है पर एक लिमिट होनी चाहिए ।
ये न हो फिर कुछ दिन बाद कि हम दोनों को लगने लगे पछताना पडे कि हम फंस गये प्यार करके।
एक दूसरे की कदर होनी चाहिए समझ होनी चाहिए।एक ही व्यक्ति कितना झुकेगा और फिर ऐसे में रिश्ता भी बोझ लगेगा और कुछ ही दिन में अपने साथ कई जिंदगियों को खराब कर देगा।
सच बताउं यार मै उसे बेइंतहां प्रेम करता हूँ और उसे खोना नहीं चाहता पर कभी कभी ऊब जाता हूँ उसके ऐसे बरताव से।
मै हर बार झुका हूँ सिर्फ अपने प्रेम को बचाने के लिए पर वह है की...।
कभी कभी बच्चों के जैसे जिद कर बैठती है उसे कोई फर्क नहीं पडता की मेरा काम सही चल रहा है या नहीं  अगर कुछ डिमांड हुई है तो पूरी होनी चाहिए यार अब ये बता ये भी कोई बात हुई।
बस यार इन्हीं उलझनो से तंग आकर मैने अपना नम्बर बंद कर रखा है कि शायद समझ आ जाए
यार अभी एक माह पहले की बात है वह मुझे अपने साथ शापिंग के लिए ले गई जहाँ उसने दो डेरेस ,एक पर्स और कुछ फालतू के आइटम कुल मिलाकर सात आठ हजार का बिल बना।
मैने उसे समझाने की कोशिश की कि काव्या तुमने अभी पिछले महीने ही शापिंग की थी इतना सब किस लिए । फिर क्या था मेम साहिबा शुरू हो गई वहीं पर तुम्हें मेरी परवाह नहीं ,तुम बदल गये हो,मेरी हर छोटी बडी खुशी से तुम्हें जलन होती है चिढ होती है न जाने क्या क्या न कहा होगा।
कभी कभी ऐसा लगता है उसे मुझसे नहीं मेरी दौलत से प्यार है
यार मै उसे तो कभी टोका टाकी नहीं करता कि तुम क्या करती हो ,कहाँ जाती हो,किससे मिलती हो,किससे बात करती हो?
पर इसका ये मतलब नहीं कि मै उसकी परवाह नहीं करता।करता हूँ बहुत करता हूँ पर इस तरह से नहीं कि लगने लगे की कोई जासूसी कर रहा है।
और तुझे तो पता ही है यार कि उसे एक खरोंच भी आती है तो मुझे अहसास हो जाता है ।
सोचने पर मजबूर हो जाता हूँ यार कि कहीं मै जल्द बाजी तो नहीं कर रहा ।
मै तो बस यही चाहता हूँ कि वह पहले वाली काव्या बन जाये बस।.....


Writer~ Amit Sahu

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