#चश्मिश #


बात ज्यादा पुरानी नहीं है बस अभी साल दो साल पहले की है । अक्षत जो अभी अभी इंटर प्रथम श्रेणी में पास करने के बाद "मेेेेरा शहर" में आगे की पढाई अर्थात ग्रेजुएशन करने के लिए आया था।
उसका एडमिशन हो गया था और उसे अब आज पहली क्लास लेनी थी ।पर भय से मरा जा रहा था और उसका भय था की कहीं  सीनियर लडके उसकी रैगिंग न करें ,जैसा की उसने सुन रखा था।
और रैगिंग तो लगभग सभी कालेजों यूनिवर्सिटीज में होती ही है। अभी डरते डरते 
वह गेट से अन्दर घुसा ही था की एक चश्मा लगाए लडकी उससे पूछती है प्रींसिपल का रूम कहाँ है?
ठीक वैसे ही जैसे हम अक्सर फिल्मों में देखते है।
कालेज का पहला दिन और हीरो हिरोइन की इंट्री कुछ इसी अंदाज में यहाँ भी हो रहा था।
अक्षत को समझ नहीं आया उसकी रैगिंग हो रही है या सच में चश्मिश को नहीं पता प्रिंसिपल का रुम।

अक्षत उस चश्मिश को घूर कर ऊपर से नीचे तक देखता रहा और मन ही मन खुश होता रहा और सोचता है "यार अक्षत तेरी रैगिंग भी हो जायेगी तो चलेगा ।"
इतने में चश्मिश ने कहा,"हैलो! आप बताएंगे प्रिंसिपल सर का रूम कहाँ पर है ?
अक्षत कुछ बोलता इससे पहले ही चश्मिश फिर बोल पडी , आप भी नये हैं क्या इस कालेज में?
अक्षत ने बिना एक शब्द बोले बस अपनी मुंडी सर हिला दिया ,हाँ में।
तो इसमें इतना सोचने की क्या बात चश्मिश ने कहा।
अक्षत ने कहा ,अरे कुछ नहीं बस ऐसे कुछ सोचने लगा था । हाँ मैंने भी इसी वर्ष एडमिशन लिया है मुझे भी नहीं पता प्रींसिपल सर का आफिस ,मेरा भी पहला दिन है  चलो मिलकर ढूंढते हैं चश्मिश। क्या?
क्या कहा तुमने ?मेरा चश्मिश नहीं, काजल नाम है ।काजल गुप्ता। और 
तुम बताओ तुम्हारा क्या नाम है?
मैने कहा अक्षत , अक्षत गुप्ता।
इतना कहकर सोचने लगा कि लडकी बहुत फ्रैंक है।
अक्षत जानकर बहुत खुश हुआ कि चश्मिश भी उसी की क्लास में है।
फिर क्या अक्षत की तो बांछे खिल गई थी मानो पढने के लिए नहीं वो चश्मिश के लिए और चश्मिश उसके लिए आये थे कालेज।
कभी कभी खयाली पुलाव कितना खुशी दे जाता है इंसान को वो अक्षत को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता था।

पर आदमी ये नहीं जानता कि अगर खुद का घर आग में जल गया हो और पडोसी का बचा हो तो बहुत पीडा कष्ट देता है।
ठीक वही हाल अक्षत का था कि अभी जुम्मा जुम्मा चार दिन हुए नहीं होंगे और महाशय पढने की बजाय मोहब्बत के गीत गुनगुना रहे थे।
पर अक्षत को उसका अभी नाम ही पता चला था और उसके जीवन के बैकग्राउंड के विषय में कुछ भी नहीं पता था इसलिए वह थोडा डरता भी था पर उसे चिढाने के लिए चश्मिश ही कहता था और वो चिड जाती पर उसे अच्छा भी लगता था ।
कुछ ही महिनो में अच्छी दोस्ती हो गई , अक्षत के दिल में प्रेम की घंटी बजने लगी  उसे लगता कि चश्मिश भी उसे चाहती होगी ।अक्षत ने वेलेंटाइन डे को प्रपोज करने का मन भी बना लिया था और वो दिन भी आ गया
जब अक्षत ने चश्मिश से अपने ही एक अलग अंदाज में कहा ,
" पूरी कायनात घूम लू,पर तुझसा न मिलेगा कोई। 
मेरे दिल में रहने वाली,
मेरी नींदे चुराने वाली,
पहले ही नजर में ,दिल में समा जाने वाली,
तुझे भी मुझसा न मिलेगा कोई।।
कह दू मै आज तुझको,
आई लव यू ।
देर न हो जाये कहीं तुझे छीन न ले मुझसे कोई और तू कह दे 
आई डोंट लव यू।। 
मै ही कह देता आई लव यू ।चश्मिश 
आई लव यू ।।
चश्मिश इकदम सांत आंखें फटी की फटी उसे तो समझ ही नहीं आया की ये अक्षत है या कोई और।
और ये क्या बोल रहा है ?चश्मिश खुद को संभालते हुए देखो हम यहाँ पढने आये है 
और मैं साफ साफ बता दू की हम केवल एक अच्छे दोस्त हैं बस।
और इसके आगे के रिश्ते का कोई भविष्य नहीं।
और काजल अर्थात चश्मिश ने कहा एक बात और  कि मै किसी से प्रेम करती हूँ ।
और मैं किसी से चीट नहीं कर सकती। और मै तुम्हे भी अंधकार में नहीं रख सकती।
तुम दिल न छोटा करो यार तुम्हें कोई न कोई मिल जायेगी यू नो यू आर अ इनोसेंट गाय।
अक्षत😌 हमम 
और आंखों में आंसू लिए चला गया था वहाँ से अपने टूटे दिल को लेकर और भविष्य में फिर कभी धोखा न खाने या प्रेम करने के लिए।
कैसा इंनोसेंट ,दिल टूट गया था अक्षत का ,उसने तो फिर एक शब्द भी न कहा था सिवाय इतना कि
"एक किताब की तरह हूँ मैं,
कितनी भी पुरानी हो जाये,
पर उसके अल्फाज नहीं बदलेंगे।
कभी याद आये तो ,पन्ने पलटकर देखना,
हम आज जैसे हैं,कल भी वैसे ही मिलेंगे।।"

लेखक -अमित साहू

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