एक और प्रेम कहानी की शुरुआत
रवीश " मेरा शहर "आया हुआ था ,अपने किसी रिलेटिव की शादी में।
और यही उसकी मुलाकात हुई थी अंजली से ,पहली मुलाकात।
जिसे देखते ही रवीश के मन में बस यही खयाल आया था कि ,"काश ये मेरी होती ।" रवीश के कुछ दोस्त जो वहाँ उसके साथ में ही थे वे सभी अंजली की तारीफ में कसीदे पढे जा रहे थे इतने में ही रवीश बोल पडा' अबे सुनो वो तुम्हारी होने वाली भाभी है ,तो ज्यादा नहीं बोलना समझ में आयी बात ' मै अभी जा रहा हूँ उसे प्रपोज करने।
उसके दोस्त कहने लगे अरे भाई हम तो बस मजाक कर रहे थे तुमने सीरियसली ले लिया ,हमें तो उसका नाम भी नहीं पता ,तुम्हें पता है क्या?
रवीश बोला ," नहीं पता है तो क्या ?अभी पता हो जायेगा तुम देखते जाओ बस।
उसके दोस्तों ने कहा " वैसे रवीश , भाभी सुंदर है ,अच्छी पसंद है। देखो भाभी जी को कितनी सुंदर
गेहुआं रंग,काले लम्बे बाल,बडी आंखें और सबसे खास बात उनकी स्माइल , जो किसी का भी मन मोह ले। मैने कहीं पढा था शायद दिनकर जी कि कविता है जिसमें उन्होंने ने लिखा है ," जो पर्वतों के आगे डिग नही सकता ,जो योध्दाओ से हार नहीं सकता पर मंद हो जाती है उसकी तलवार की धार ,वह हार जाता है इक स्त्री की मंद मुस्कान से।" कुछ ऐसी ही भाभी की मुस्कान है , देखो रवीश भाई, देखो, कैसे बाते कर स्माइल कर रही है ।
रवीश बोला देख रहा हूँ अब तुम ज्यादा चूं चपड न करो अब देखते जाओ मै क्या करता हूँ?
रवीश कुर्सी से उठा और कुछ फिल्मी स्टाइल में खाने कि एक प्लेट उठाई और जाकर थोडा सा भोजन प्लेट मे सजाकर चल दिया अंजली की ओर ,और जाकर टकरा गया जिससे उसके कपडे में थोडी सी मटर पनीर गिर गई । अंजली घूरकर देखने लगी और बोली ये क्या बदतमीजी है। इतने में रवीश ने माफी मांगी और कहा गलती से हो गया मेरे दोस्त परेशान कर रहे थे उनसे बचने के चक्कर में ये सब हो गया । ऐम सारी।
और इतना सुनते ही अंजली ने कहा ,"कोई बात नहीं इट्स ओके।"
और अंजली का सारा गुस्सा ठंडा हो गया ।
और रहे रवीश बाबू उन्होंने मौका अच्छा समझा और चौका दे मारा अपने प्लान के मुताबिक और बोले ," आप बहुत अच्छी हैं इतना सुनते ही उसने थैंक यू कहा और एक प्यारी सी किसी को भी घायल कर देने वाली स्माइल कर दी।
रवीश वहीं खडा रहा और फिर बोला वैसे बुरा न माने तो आपका नाम जान सकता हूँ ।
उसने बताया ,"अंजली "। और आपका
तब उसने भी अपना नाम बताया,"रवीश ।"
रवीश आकर अपने दोस्तों को बताया उसका नाम अंजली है और बोला देखो कैसे आज मैं इसे अपना बना कर जाता हूँ। उसका एक दोस्त मंजीत बोल पडा हां भाई लगे रहो सफलता जरूर मिलेगी कविवर हरिवंश राय बच्चन लिखते हैं
" लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती।
कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती।।"
लगे रहो भाई लगे रहो भाभी जरूर अपनी हो जायेगी।
और तभी उसके दोस्तों में दूसरा दोस्त रूपेश बोला भाई तुम्हारी जो और तीन चार गर्लफ्रेंड हैं उनका क्या होगा ये भी वैसे ही रहेंगी या फिर कुछ और?
रवीश ने कहा ,"अबे गोपिकाएं तो बहुत थी श्री कृष्ण की पर सब राधा थोडे ही थी बात समझ में आई ये मेरी राधा बनेगी ,समझे। बाकी गोपीकाए गोपीकाए ही रहेंगी।
देख उसे , तब से मेरी ओर ही देखे जा रही है ।" रवीश के दोस्तों ने भी कहा , हाँ यार, देख तो इधर ही रही है लगता है कुछ उसके भी दिमाग में चल रहा है तुम्हारे लिए।
तुम्हारी तो निकल पडी गुरु,
अब तो पार्टी सार्टी बनती है इस नई भाभी की खुशी में।
रवीश बोला चुप रहो बे ,
"बस्ती अभी बसी नहीं लुटेरे पहले आ गये।"
पहले काम तो बन जाने दो ,
फिर पार्टी क्या जो कहोगे वो होगा।
और उधर अंजली भी अपनी सहेली सौम्या से जो हुआ था सब बता रही थी। रवीश की वो मासूमियत भोलापन बात करने का लहजा और माफी मांगने की स्टाइल उसके दिल को छू गये थे।
सौम्या ने कहा हाँ यार लडका तो हैण्डसम दिखता है क्या नाम बताया इसका।
अंजली ने कहा , रवीश बताया है उसने अपना नाम।
सौम्या ने कहा अच्छा तभी सौम्या ने देखा की सभी जयमाल की तरफ जा रहे तो उसने भी उधर चलने को कहा क्योंकि
जयमाल का भी वक्त हो चला था और सभी वहीं जयमाल होने की जगह इकट्ठा होने लगे ।
रवीश ,रवीश के दोस्त और अंजली भी अपनी सहेली के साथ जयमाल स्टेज के पास लगी कुर्सियो में जाकर बैठ गये।
रवीश और अंजली की निगाहें एक दूजे पर आकर टिक गई और उसी वक्त एक गाना बजने लगा जिसके बोल कुछ इस तरह से थे ,
" आये हम बाराती ,
आये हम बाराती ,बारात लेकर। जायेंगे तुझको भी अपने साथ लेकर ।।"
और इस गाने ने दोनो के बीच ' आग में घी' का काम किया।
रवीश को भी पूरा विश्वास हो गया की छोरी अब पट जायेगी ।और हो विश्वास क्यूं न आखिर माहिर जो था इन कामो में।
शायद इसलिए कहते हैं," Experience makes better everyperson."
फिर चाहे वह कैसा भी कार्य क्यो न हो?
वरमाला डालने का समय हो गया था
और सभी का ध्यान दूल्हे और दूल्हन पर था जबकि रवीश का ध्यान अंजली पर । रवीश ने देखा कहा मौका अच्छा है बात करने का और जा पहुचा अंजली के पास और बोला ,"अंजली बुरा न मानो तो एक बात कहूँ।"
अंजली ने भी अपनी सहमती जता दी बोली कहिए क्या कहना है आपको और अगर बुरा मानने वाली बात न हुई तो बुरा क्यो मानेगे ?
रवीश ने कहा , "आप बहुत सुंदर है आप पहली ही नजर में पसंद आ गई। मुझे प्रेम हो गया है आपसे।"
घुटने के बल बैठते हुए पूरी फिल्मी स्टाइल में , रवीश ने अपने प्रेम का इजहार करते हुए कहा अंजली आई लव यू ।
डू यू लव मी आर नाट । मै जानता हूँ तुम्हारे लिए निर्णय लेना आसान नहीं पर फिर भी जानना चाहता हूँ और इसी बीच दोनो की निगाहे चार हो गई ।
अंजली मन ही मन खुश हो गई पर कहा कुछ नही और जयमाल की भीड़ में जाकर अदृश्य सी हो गई।
रवीश के दोस्तों ने पूछा भाई सेटिंग हुई की नहीं।
रवीश ने कहा वह कुछ नहीं बोली पर यकीन है कि वह वापस आयेगी।और इस गाने के बीच ही जिसके बोल थे ," मिले हो तुम मुझको, बडे नसीबो से।
चुराया है तुमको किसमत कि लकीरो से ।
मेरी मोहब्बत को सांसे मिली हैं ,
रहना तुम दिल के करीब होके।।"
अंजली आई और एक कागज में अपना फोन नम्बर देकर बिना कुछ कहे अपनी सहमति जताकर चली गई और इस गाने उस मोमेंट में चार चांद लगा दिया।
बस फिर क्या इस तरह से शुरू हुई दोनो की प्रेम कहानी।....✏
लेखक- अमित साहू...


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