गर्लफ्रैंड एक खोज
बस आकर लोगों को डराते हैं तो कभी कभी उत्साहित करते हैं कुछ ऐसे ही कार्तिक के दिल हाल भी था जो गर्लफ्रैंड बनाने के लिये उतावला था।
कार्तिक यही कोई तेइस चौबीस वर्ष का रहा होगा पर उसके घर में अब उस पर शादी कर लेने का दबाव बनाया जाने लगा था पर उसके हृदय में तो गर्लफ्रेंड बनाने की इच्छा जन्म ले चुकी थी ।तो ऐसे मे वह शादी कैसे कर सकता था ।वह शादी करने के सवाल पर न नुकुर करता और बहाने बना देता ।
हद तो तब हो गई जब लोग उसे देखने आने लगे और कई लोग तो उसे देख भी चुके थे।
पर कार्तिक था कि उसने अपनी मा से कह दिया कि देखो चाहे कुछ भी हो जाए मुझे शादी ब्याह के चक्कर में अभी नहीं पडना । पहले मै अपने पैरों पर खडा हो जाऊ कुछ ढंग का काम करने लग जाऊं तब करुंगा शादी ।
पर सच बात तो ये थी की ये सब उसके बहाने थे उसका मानना था कि शादी तो एक दिन करनी ही है तो क्यों न पहले कोई गर्लफ्रेंड ही बना ली जाये। गर्लफ्रैंड बायफ्रेंड की लाइफ भी तो जी ली जाए कैसी होती है?
इसलिए कार्तिक महोदय शादी जैसी बला से साफ इंकार करते कि एक दिन तो ओखली में सर देना ही है तो आज ही क्यो दूं?
मा बाप ,मा बाप ही होते हैं उन्हें खबर हो ही जाती है संतान के न बताने पर भी कि उनकी संतान के दिमाग में क्या चल रहा है और शायद कार्तिक के माता पिता ने कार्तिक के मन को भांप लिया था इसलिए वह कार्तिक की शादी के लिए दबाव बना रहे थे कि कहीं ऐसा न हो कि उनका लडका समाज मे नाक कटा दे,और वह मुह दिखाने के काबिल न बचे। तो वहीं दूसरी तरफ कार्तिक था जो गर्लफ्रैंड की खोज मे था।
पर मुझे जहाँ तक लगता है कि कार्तिक के जीवन मे ये गर्लफ्रैंड नामक बला शायद है ही नहीं।
बला इसलिए कहा क्योंकि ये भी कुछ वैसे ही होती है जैसे "जो शादी का लड्डू खाये पछताए जो न खाए वो भी पछताए।"प्रेम मोहब्बत मे दिन का सुकून और रातों की नीदें सब हराम हो जाती है साहब,और कार्तिक था कि अपने पैरों पर खुद ही कुल्हाड़ी मारने चला था मानने को तैयार ही नहीं था । वह लगातार गर्लफ्रैंड की खोज मे लगा रहा।
पर कार्तिक की किस्मत तो बिल्कुल जैसे रूठी हुई थी अगर उसे कभी लगता कि अब उसकी बात बन जाएगी तभी उसे आगे से नो इंट्री का संकेत मिल जाता ठीक वैसे ही जैसे दिल्ली मुम्बई जैसे शहरों मे टैक्सी आटो वाले सवारी के बैठते ही नो इंट्री का प्लेट लगा देते हैं।
कार्तिक बेचारा हाथ मसोस कर रह जाता अपनी हथेलियों को देखता और फिर एक आश से आसमान की ओर देखता अपने भाग्य को कोषता और कहता ,क्या भगवान मेरे लिए एक भी गर्लफ्रैंड नहीं बनाई। सिंगल ही मारना है क्या? मेरे दोस्तों को तो दे रखी है एक नहीं कई और मेरे लिये?"
ऐसा कहकर मन की भडास बाहर निकाल देता जिससे उसका मन हल्का हो जाता और निकल पडता एक नई उमंग के साथ गर्लफ्रैंड की खोज मे।
मुझे हरिवंशराय बच्चन जी की कविता याद आ गई जो बिल्कुल कार्तिक के ऊपर सटीक बैठती है, " लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती।
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।।"
ये उम्र ही ऐसी होती है कि न चाहते हुए भी हमारे हृदय तल मे प्रेम की तरंगें उठने लगती हैं जो ज्ञान की बडी बडी बातें बघारते हैं उनका ज्ञान भी धरा का धरा रह जाता है जब प्रेम के जाल मे फसते हैं।
और प्रेम मे पडे हुए व्यक्ति को समझाना तो फिर लोहे के चने चबाने जैसा होता है।
कार्तिक को अपनी स्थिति पर दुख भी होता है, गुस्सा भी आता है और आश्चर्य होता है कि वह हैंडसम है स्मार्ट है रुपये भी ठीक ठाक कमा लेता है ।फिर क्या कमी है वजह है जो उसकी कोई गर्लफ्रैंड नहीं।, फिर कैसे किसी को पहली नजर मे, पहली ही बार मे प्यार हो जाता है,कैसे?
उसकी दिवानगी ने तो सारी हदें पार कर दी फ्री होते ही सोचने लगता की लडकियों का समूह कहाँ कहाँ दिखाई पड सकता है उसने इस पर अध्ययन किया तो समझ आया कालेज, कालेज के रास्ते पर, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, हास्पिटल आदि जगह लडकियां खूब रहती हैं ठीक वैसे ही जैसे एक ज्योतिष सब कुछ अध्ययन कर लेता है कि किसी मनुष्य के जीवन मे क्या क्या हो सकता है अब कार्तिक को अगर रास्ते मे भी कोई दिख जाता तो बस " काश ये मेरी होती इसके जैसा कोई मिल जाता ,ऐसी मेरी भी कोई होती और उन्हें बडी कातिल निगाहों से घूरता रहता और अगर कोई अपना फेस ढककर जा रहा होता तो गाना गुनगुनाता "अकेले अकेले कहाँ जा रहे हो।
हमें भी अपने साथ ले लो.....।"
शादी ब्याह मे जाता तो वहाँ भी उसकी नजर हर एक सुंदर लडकी मे अपनी गर्लफ्रैंड की तलाश होती ।
पर उसे आज तक कोई न मिला जो उसकी गर्लफ्रैंड बन जाती वैसे लडकियां तो बहुत थी पर जिस प्रकार की वह चाहता था वैसी नहीं मिल रही थीं, क्योंकि कहीं न कहीं उसके हृदय मे ये भी था कि सिर्फ गर्लफ्रैंड ही नहीं बनाना है बल्कि पत्नी भी।
जिसकी आंखें बडी कजरारी, रंग गोरा, लंबे काले बाल और जितनी खूबसूरत तन से हो मन से भी उतनी ही हो।एक नशा जैसा हो गया था कार्तिक को ,जो सिर्फ हर जगह हर राह मोड पर हर किसी मे उसकी नजरें एक गर्लफ्रैंड की ख़ोज करती,हर किसी लडकी मे उसे अपनी गर्लफ्रैंड नजर आती ।
या यूं कहूं उसे गर्लफ्रैंडफोबिया हो गया था तात्पर्य गर्लफ्रैंडफोबिया नामक बीमारी से ग्रसित हो गया था। इसके अलावा उसमें और कोई खोट नहीं था किसी प्रकार का कोई दुर्व्यसन नहीं था न सिगरेट, न बीडी, न गुटखा तम्बाकू न दारू शराब , उसका एक ही नशा था गर्लफ्रेंड और उसकी इस चाहत के कारण अब
उसके दोस्त उसका मजाक बनाने लगे थे खिल्लियां उडाते थे पर वो था की गर्लफ्रैंड के लिए दीवाना था इसलिये मुझे उसके लिए कहना पड रहा है कि शायद उसके मन में यह बात रही हो," खुदी को कर बुलंद इतना की ,कि खुदा भी आकर पूछे बंदे से कि बता तेरी रज़ा क्या है।"
पांच से छ: घंटे काम करने के बाद फ्री होकर गली नुक्कड़ बस स्टैण्ड आदि के चक्कर लगाता रहता और जब उसके बडे भैय्या को यूं ही बेमतलब घूमने का पता चला तो उन्होंने डाट लगाते हुए कहा कि व्यर्थ मे समय न गवाओ कम्प्यूटर वगैरह सीख लो जो भविष्य मे काम देगा ।कार्तिक को गुस्सा तो बहुत आया पर बडे भैया थे और पता नहीं कहां से कार्तिक को अकल आ गई बोला, "ठीक है भैय्या कल से ही कम्प्यूटर क्लास ज्वाइन करता हूं।"
अगले दिन जब काम से लौटने के बाद जब कम्प्यटर क्लास मे जाकर देखा तो बडे भैया के ऊपर जितना क्रोध था सब शांत हो गया कारण आठ दस लडकियां भी कम्प्यूटर सीख रही थीं और महोदय को लगा कि शायद यहां कुछ बात बन सकती है और जैसे ही कार्तिक क्लास के अंदर घुसा लडके और लडकियां सभी ऐसे देखने लगे मानो उनकी क्लास मे कोई इंसान नहीं बंदर घुस आया हो।
कर्तिक की पारखी नजरें जो घुसते ही एक निहायती खूबसूरत चहरे पर जा पडी।
कार्तिक की हृदय की गति तीव्र होने लगी।
कम्प्यूटर वाले सर भी आ गए और आते ही बोले," बैठो कार्तिक आज तुम्हारा पहला दिन है तो तुम्हें कम्प्यूटर को ओपन करना क्लोज करना कुछ बेसिक फंडे और पेंटिंग करना बताया जायेगा।"
सर ने उसी खूबसूरत लडकी को बुलाया ,"पायल ,
यहां आओ । देखो कार्तिक अभी न्यू है तो इसे तुम सब बेसिक फंडे बता दो।
पायल ठीक है सर कहकर कार्तिक को बताने लगी।
ये सब करीब हफ्ते भर चलता रहा और इस बीच दोनों मे अच्छी दोस्ती हो गई खूब हंसी मजाक ठिठोलियां होती और कभी कभी कार्तिक सहम जाता दिल धक से करके रह जाता जब पायल का सेलफोन बजता और वह कट कर देती या अभी क्लास मे हूं फ्री होकर बात करुंगी जैसे शब्द सुनकर कार्तिक का चहरा मुरझा सा जाता । उसे लगता की ये भी शायद कहीं....।
पर फिर भी नजरअंदाज कर देता क्योंकि वह अपने रिश्ते को मजबूत धागे से बांधना चाहता था और शक करके कमजोर नहीं करना चाहता था।
उसका रिश्ता जो एक नये रिश्ते की ओर बढ रहा था और इसलिए भी क्योंकि कितने लंबे इंतजार के बाद उसे कोई मिला था जो उसकी थोड़ी परवाह करता था
जो उसके बारे मे सोचता था जो बताता था क्या अच्छा है क्या बुरा। तीन चार माह बीत गए और दोनों की खूब बनने लगी थी ।
पायल का कोर्स लगभग अब खत्म होने को था जब यह बात कार्तिक को पता चली तो उसकी हृदय की धडकने बढ गई और उसने निश्चय किया कि अब वह अपने दिल की बात पायल को बता देगा।
उससे अपने प्यार का इजहार कर देगा वह सोच ही रहा था कि एक रात पायल का फोन आया और उसने कहा कार्तिक तुम मेरे प्रश्नों का उत्तर दोगे?
कार्तिक ने कहा हां बिल्कुल दूंगा पर कार्तिक बिल्कुल अंजान था इस बात से कि क्या होने वाला है?
पायल ने कहा मुझे ऐसा क्यों लगता है कि तुम मुझे पसंद करते हो लव करते हो,कार्तिक देखो मुझे कभी कुछ और नहीं लगा बस हम इतने दिनों मे एक अच्छे दोस्त बन गए हैं शायद बहुत अच्छे वाले दोस्त बस और कुछ नहीं और लव जैसा तो मैने कभी सोचा भी नहीं।
कार्तिक कुछ भी न बोल सका सिवाय हमम,सही है जैसे शब्दों के अलावा और वह बोलता भी क्या उसकी दुनिया तो बसने से पहले ही उजड गई थी सिर्फ एक मामूली हवा के झोंके मे तो वह क्या कहता। बिल्कुल इस गीत के जैसे " मेरा जीवन कोरा, कागज़ कोरा ही रह गया; जो लिखा था आंसुओं संग सब बह गया; मेरा जीवन कोरा कागज़ कोरा ही रह गया।" वैसे भी यह सब तो उसके जीवन का हिस्सा बन चुका था शायद उसके नसीब मे यही सब था उसके जीवन का हिस्सा बन चुके गीतों को सुनता हुआ सोने चला गया।,कि
" चांदी की दीवार न टूटी प्यार भरा दिल तोड़ दिया,
इक धनवान की बेटी ने निर्धन का दामन छोड़ दिया............।"
"दिल के अरमा आंसुओं मे बह गए
हम वफा करके भी तन्हा रह गए
दिल के अरमा आंसुओं मे बह गए.........!"
खुद को समझाते संभाल्ते सो गया कि कोई बात नहीं यार कार्तिक ये तेरे लायक थी ही नहीं । छोड़ जाने दे ये न सही कोई और होगा।
कल से हम फिर खोज मे निकलेंगे और कल से कम्प्यूटर क्लास भी बंद कहकर कार्तिक सो गया।
और इस तरह कार्तिक की गर्लफ्रैंड की खोज आज भी जारी है।
धन्यवाद
लेखक - अमित साहू
कहानी आपको कैसी लगी कमैंट करके जरूर बताए।

Bahut achi lagi
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